Monday, June 6, 2011

फूल ने छेड़ी ग़ज़ल

फूल ने छेड़ी ग़ज़ल तो एक पत्थर रो पड़ा !


टूटी जब माला तो इक मोती बिखर कर रो पड़ा !!


जब नदी आकर मिली तो हाल कुछ ऐसा हुआ ,


झूम कर लहराया पहले फिर समंदर रो पड़ा !!