Monday, May 17, 2010

मेरे गीत तुम्हारे लब तक


दिल को छूने वाले सारे ही सामान चले आयेंगे !

शब्दों के ये भोले भाले कुछ मेहमान चले आयेंगे !

मंच मिले ना मिले मुझे अब इसकी भी परवाह नहीं है ,

मेरे गीत तुम्हारे लब तक कानों-कान चले आयेंगे !!

प्रीत से ऊपर हो तुम

हो कभी चन्दन कभी कुमकुम कभी केसर हो तुम !
पूजता हूँ तुमको मेरी प्रीत से ऊपर हो तुम !
प्यार के प्यासे मरुस्थल सा है मेरा मन प्रिया ,
और लहराता लहकता स्नेह का सागर हो तुम !!