कविता कलश
Monday, May 17, 2010
प्रीत से ऊपर हो तुम
हो कभी चन्दन कभी कुमकुम कभी केसर हो तुम !
पूजता हूँ तुमको मेरी प्रीत से ऊपर हो तुम !
प्यार के प्यासे मरुस्थल सा है मेरा मन प्रिया ,
और लहराता लहकता स्नेह का सागर हो तुम !!
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