कविता कलश
Sunday, May 19, 2013
एक दिन अभिव्यक्त मेरे मन की हर संवेदना हो !
एक क्षण ऐसा मिले जब बीच में मतभेद ना हो !!
एक पल प्रीतम हमें एकान्त कुछ ऐसा मिले ;
एक मेरा मीत हो ; और एक मेरी वेदना हो !!
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