Friday, October 7, 2011

एक पाव तीखी बातें मैंने डाल दी हैं पर
तीन पाव से ज्यादा प्यार भी है गीत में
क्रोध और वेदना का लावा यदि फूटता है
प्रीत की सुरीली रसधार भी है गीत में
ताने हैं उलाहने हैं थोडा मतभेद है तो
भावना की मौन मनुहार भी है गीत में
शिव का कड़कता सा डमरू भी बजता है
शारदा का कोमल सितार भी है गीत में

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