Tuesday, January 19, 2010

सोने के हिरन सी वो

सोने के हिरन सी वो चन्द्र की किरण सी वो ,

मोहक मिलन सी वो मूर्ति है मन में !

उसके सिवा तो कुछ सूझता नहीं है अब ,

नाम उसका है मेरी हर धड़कन में !

अक्स आइने में मेरा आए ना नज़र मुझे ,

छवि उसकी ही दिखती है दर्पण में !

उस से मिला तो मेरा मन ऐसे झूम उठा ,

राधा को मिलें हों श्याम जैसे मधुबन में !

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