सोने के हिरन सी वो चन्द्र की किरण सी वो ,
मोहक मिलन सी वो मूर्ति है मन में !
उसके सिवा तो कुछ सूझता नहीं है अब ,
नाम उसका है मेरी हर धड़कन में !
अक्स आइने में मेरा आए ना नज़र मुझे ,
छवि उसकी ही दिखती है दर्पण में !
उस से मिला तो मेरा मन ऐसे झूम उठा ,
राधा को मिलें हों श्याम जैसे मधुबन में !
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