Saturday, September 29, 2012

विष-पान 

सुन मानव ,
शिव बन कर तुझ को ,
ये विष खुद ही पीना होगा !
जैसा भी हो तेरा जीवन ,
तुझ को हँस कर जीना होगा !
ये सच है की तूने  अपना ,
मनचाहा वरदान न पाया !
अधिकारी था जिसका , तूने 
अब तक वह  सम्मान न पाया !
पर ना हिम्मत हार मिलेगा ,
अब तक जो स्थान ना पाया !
चमकेगा नक्षत्र की भांति ,
तू भी एक नगीना होगा !
जैसा भी हो तेरा जीवन ,
तुझ को हँस कर जीना होगा !!
ये बाधायें , ये सारे दुख ,
जीवन के शिक्षक होते हैं !
रोते हैं जो विपदाओं में ,
कर्महीन , कायर होते हैं !
वीर नहीं विपरीत समय में ,
निज मन का साहस खोते हैं !
तार-तार होगा जब दामन ,
तुझ को खुद ही सीना होगा !
जैसा भी हो तेरा जीवन ,
तुझ को हँस कर जीना होगा !!

No comments:

Post a Comment